Fringe Notes!
अहम् ब्रह्मास्मि

The Entrepreneur

Poetry

मैंने उसको जब-जब देखा
लोहा देखा
लोहे जैसा तपते देखा
गलते देखा
ढलते देखा
मैंने उसको गोली जैसा चलते देखा

~ केदारनाथ अग्रवाल