Fringe Notes!
अहम् ब्रह्मास्मि

धर्म ऐवम कर्म

Poetry

धर्म

“जो धारण किया जय, वो धर्म होता है। एक कर्म प्रधान व्यक्ति के लिए, कर्म ही उसका धर्म होता है अंतह कर्म ही धर्म है |”